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चीनी राजदूत हाओ यांकी ने पीएम ओली पर साधी चुप्‍पी, बोलीं-भारत और नेपाल विवाद में चीन को घसीटा जा रहा

Edited By Shailesh Shukla | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

ओली को बचाने के सवाल पर कन्‍नी काटती नजर आईं चीनी राजदूतओली को बचाने के सवाल पर कन्‍नी काटती नजर आईं चीनी राजदूत

काठमांडू

भारत विरोधी भावनाओं को भड़काने के आरोपों से घिरीं चीन की नेपाल में राजदूत हाओ यांकी ने कहा है कि नई दिल्‍ली और काठमांडू के बीच विवाद में उनके देश को जबरन घसीटा जाता है। उन्‍होंने कहा कि कालापानी का मुद्दा नेपाल और भारत के बीच का है और दोनों देशों को इस मुद्दे को और ज्‍यादा जटिल बनाने वाली किसी भी एकतरफा कार्रवाई से बचना चाहिए। वहीं चीनी राजदूत केपी ओली सरकार को बचाने के अपने प्रयासों पर जवाब देने से कन्‍नी काटती नजर आईं।

नेपाली अखबार नया पत्रिका को द‍िए इंटरव्‍यू में चीनी राजदूत हाओ ने कहा, ‘कालापानी का मुद्दा नेपाल और भारत के बीच का है। हम आशा करते हैं कि दोनों देश इस मुद्दे का आपसी बातचीत के साथ समाधान कर लेंगे। साथ ही ऐसी किसी भी ए‍कतरफा कार्रवाई से बचेंगे जिससे यह मुद्दा और ज्‍यादा जटिल हो जाए। भारत और चीन के बीच वर्ष 2015 में साइन हुए संयुक्‍त घोषणा पत्र में इस विवादित जमीन के किसी भी देश की संप्रभुता का मुद्दा शामिल नहीं था। व्‍यापार का यह परंपरागत रास्‍ता सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुविधा के लिए है। इसकी ज्‍यादा मतलब निकालने की जरूरत नहीं है।’

‘कुछ ऐसी शक्तियां हैं जो चीन को घसीटना चाहती हैं’

हाओ ने कहा, ‘मैंने नोटिस किया है कि जब भी भारत और नेपाल के बीच संबंधों में विवाद होता है तो कुछ ऐसी शक्तियां हैं जो चीन को घसीटना चाहती हैं। वे कुछ भी बेमतलब की बाते करते हैं और अफवाह फैलाते हैं। हम बहुत भ्रमित महसूस करते हैं। मैं विश्‍वास करती हूं कि इससे चीन और नेपाल के बीच दोस्‍ती में कोई बाधा आएगी।’

ओली को बचाने के लिए नेपाल के आंतरिक मामलों में हस्‍तक्षेप के सवाल पर हाओ यांकी ने कहा कि चीन ने हमेशा से ही नेपाल की संप्रभुता का सम्‍मान किया है। उन्‍होंने ओली की सत्‍ता को बचाने के अपने प्रयासों पर सीधा-सीधा कुछ नहीं कहा। चीनी राजदूत ने कहा, ‘नेपाल एक स्‍वतंत्र देश है और किसी भी देश को उसके आतंरिक मामलों में हस्‍तक्षेप नहीं करना चाहिए। विकास और द्विपक्षीय सहयोग पर आपसी विचारों का आदान प्रदान एक सामान्‍य राजनयिक प्रक्रिया है।’

हाओ ने कहा कि अगर इसे हस्‍तक्षेप कहा जाएगा तो देशों के बीच कूटनीति होगी ही नहीं। एक म‍ित्र देश के नाते हम चाहते हैं कि नेपाल में स्थिरता रहे और एकता रहे जो राष्‍ट्रीय विकास के लिए पहली शर्त है।’ नेपाली मीडिया की मानें तो पीएम ओली और प्रचंड के बीच चल रही सत्‍ता की जंग में चीनी राजदूत हाओ यांकी ने खुलकर ओली का समर्थन किया है। हाओ यांकी लगातार नेपाल कम्‍युनिस्‍ट पार्टी में जारी मतभेदों को दूर करने के लिए बैठकें कर रही हैं।

चीनी राजदूत के हस्‍तक्षेप का नेपाल में काफी विरोध

उधर, ओली के बारे में कहा जा रहा है कि वह भारत का विरोध करके चीन को खुश करने में लगे हुए हैं ताकि उनकी सत्‍ता बची रहे। खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नेपाली पीएम देश में चीन की राजदूत हाओ यांकी के इशारे पर भारत विरोधी सभी कदम उठा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि नेपाल के नक्शे को नए सिरे से परिभाषित करने के लिए चीनी राजदूत ने प्रधानमंत्री ओली को प्रेरित करने का काम किया है।

खुफिया सूत्रों ने कहा कि हिमालयी गणराज्य नेपाल में युवा चीनी राजदूत होउ यानकी नेपाल की सीमा को फिर से परिभाषित किए जाने के लिए कॉमरेड ओली के कदम के पीछे एक प्रेरणादायक कारक रही हैं। यानी नेपाल जो भारत के कालापानी और लिपुलेख को अपने नक्शे में दर्शा रहा है, उसके पीछे चीनी राजदूत की ही कूटनीति और दिमाग काम कर रहा है। चीनी राजदूत के हस्‍तक्षेप का नेपाल में काफी विरोध हो रहा है।

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