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कोरोना वैक्सीन पाने के लिए दुनियाभर में होड़, जापान और EU ने भी किया करार

Coronavirus Vaccine Updates: कोरोना वायरस की वैक्सीन को सबसे पहले पाने के लिए दुनियाभर के देशों में होड़ मची हुई है। अमेरिका-ब्रिटेन से लेकर जापान और यूरोपीय यूनियन तक कई देश दवा कंपनियों के साथ वैक्सीन को लेकर करार कर रहे हैं। इसी कड़ी में जापान ने दवा कंपनी Pfizer और BioNTech के साथ वैक्सीन के 1 करोड़ 20 लाख डोज पाने के लिए करार किया है।

Edited By Priyesh Mishra | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

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हाइलाइट्स

  • कोरोना वायरस वैक्सीन को पहले पाने के लिए दुनियाभर में मची होड़, दवा कंपनियों के साथ समझौता कर रहे देश
  • अमेरिका, ब्रिटेन के बाद अब जापान और यूरोपीय यूनियन ने भी दवा कंपनियों से वैक्सीन की करोड़ों डोज के लिए किया करार
  • दुनियाभर में 23 से अधिक वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल के अंतिम चरण में, 3 वैक्सीन निर्माता जल्द दे सकते हैं खुशखबरी

टोक्यो

कोरोना वायरस की वैक्सीन को सबसे पहले पाने के लिए दुनियाभर के देशों में होड़ मची हुई है। अमेरिका-ब्रिटेन से लेकर जापान और यूरोपीय यूनियन तक कई देश दवा कंपनियों के साथ वैक्सीन को लेकर करार कर रहे हैं। इसी कड़ी में जापान ने दवा कंपनी Pfizer और BioNTech के साथ वैक्सीन के 1 करोड़ 20 लाख डोज पाने के लिए करार किया है।

यूरोपीय यूनियन ने सनोफी के साथ किया करार

वहीं यूरोपीय यूनियन ने फ्रांसीसी दवा कंपनी सनोफी (Sanofi) के साथ कोरोना वायरस वैक्सीन की 3 करोड़ डोज के लिए करार किया है। इसके अलावा वैक्सीन को लेकर काम कर रही कई अन्य दवा कंपनियों के समझौते को लेकर भी यूरोपीय यूनियन बातचीत कर रहा है। कहा जा रहा है कि जल्द ही अमेरिका और ब्रिटेन की वैक्सीन निर्माता कंपनियों के साथ करार किया जा सकता है।

अमेरिका ने भी की 2 बिलियन डॉलर की डील

अमेरिका ने भी कोरोना वैक्सीन की 10 करोड़ डोज के लिए Pfizer और BioNTech कंपनी के साथ 2 बिलियन डॉलर का समझौता किया है। इस दवा की अमेरिका में कीमत 39 डॉलर प्रति डोज होगी। बताया जा रहा है कि कोरोना संक्रमित इंसान को इस दवा के दो डोज की जरूरत होगी।

कंपनी ने वैक्सीन का लेट स्टेज ट्रायल किया शुरू

BioNTech और Pfizer ने सोमवार को अपनी कोरोना वैक्सीन के लेट स्टेज ट्रायल को शुरू किया है। इस वैक्सीन को लेकर दोनों कंपनियों ने कहा है कि क्लिनिकल ट्रायल के दौरान वैक्सीन ने सकारात्मक परिणाम दिया है। हम इसे अक्टूबर में सरकार को रिव्यू के लिए सौंपने की तैयारी कर रहे हैं। बता दें कि किसी भी वैक्सीन के विकास में सरकारी रिव्यू ही आखिरी चरण होता है इसके बाद यह वैक्सीन बाजार में उपलब्ध हो जाएगी।

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ब्रिटेन ने भी वैक्सीन के 6 करोड़ डोज के लिए की डील

ब्रिटेन ने Sanofi और GlaxoSmithKline से कोविड वैक्सीन की 6 करोड़ डोज की डील की है। GlaxoSmithKline (GSK) ब्रिटेन की और Sanofi फ्रांस की कंपनी है। दोनों ही दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन निर्माताओं में शुमार हैं। सनोफी और GSK ने पहली बार किसी देश के साथ अपने अंडर ट्रायल वैक्सीन को बेचने की डील की है। इससे पहले ब्रिटेन ने अग्रणी मेडिसिन और वैक्सीन कंपनियों- फाइजर, बायोएनटेक और वलनेवा के साथ महत्वपूर्ण डील की है। ये कंपनियां कोरोना वायरस के उपचार के लिए वैक्सीन तैयार कर रही हैं।

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23 कोरोना वैक्‍सीन का इंसानों पर परीक्षण जारी

दुनियाभर में करीब 150 कोरोना वायरस वैक्‍सीन पर काम हो रहा है। इनमें से 23 वैक्‍सीन का इंसानों पर परीक्षण जारी है। इनमें से भी 3 वैक्‍सीन अपने अंतिम चरण यानि फेज 3 में हैं। इसमें दो कंपनियां चीन की हैं और तीसरी ऑक्‍सफर्ड यूनिवर्सिटी की है। बताया जा रहा है कि यूरोपीय यूनियन की जॉनसन एंड जॉनसन और सनोफी कंपनी से बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। इन कंपनियों से यूरोपीय यूनियन वैक्‍सीन के डोज को फाइनल कर रहा है।

​कैसे बनी है वैक्सीन?

  • ​कैसे बनी है वैक्सीन?

    Lancet में छपे रिसर्च पेपर में बताया गया है कि यह वैक्सीन वायरल वेक्टर से बनी है जिसमें COVID-19 बीमारी पैदा करने वाले कोरोना वायरस SARS-CoV-19 का स्पाइक प्रोटीन होता है। स्पाइक प्रोटीन की मदद से ऐंटीबॉडी वायरस को पहचान पाती हैं। वैक्सीन में इस्तेमाल किया गया वायरल वेक्टर उस वायरस को जेनेटिकली इंजिनियर करके बनाया गया है, जिससे चिंपानिजयों में सर्दी-जुखाम होता है। इसे इस तरह से इंजिनियर किया गया है कि यह दिखता कोरोना वायरस जैसा है जिसकी वजह से इंसानों में इससे लड़ने के लिए प्रतिरोधक क्षमता पैदा होती है लेकिन इन्फेक्शन नहीं होता।

  • ​शरीर पर क्या असर और कितनी सुरक्षित?

    18-55 साल की उम्र के लोगों पर वैक्सीन का ट्रायल करने पर पता लगा कि इसने शरीर में प्रतिरोधक क्षमता पैदा की थी। इसमें स्पाइक प्रोटीन को पहचानने वाले T-cell और वायरस को बेअसर करने वाली ऐंटीबॉडी (IgG) भी देखी गई जो दूसरी डोज दिए जाने पर बढ़ गई। 90% लोगों में वायरस पर ऐक्शन करने वाली ऐंटीबॉडी पहली डोज के बाद और सभी लोगों में दूसरी डोज देने पर ऐंटीबॉडी की ऐक्टिविटी देखी गई। साथ ही यह भी देखा गया कि जिन लोगों को वैक्सीन दी गई थी उनमें सिरदर्द, बुखार, बदन दर्द जैसी शिकायतें हुईं लेकिन वह पैरासिटमॉल देने के बाद ठीक हो गईं। इसके ज्यादा गंभीर साइड इफेक्ट्स नहीं पाए गए जिनसे लोगों को बड़ा खतरा हुआ हो।

  • ​क्या करते हैं ऐंटीबॉडी और T-cell?

    ऑक्सफर्ड की वैक्सीन को इस रेस में सबसे आगे माना जा रहा है। न सिर्फ उसके पास AstraZeneca जैसी कंपनी का साथ है बल्कि खुद वैक्सीन भी दूसरे कैंडिडेट्स से अलग है। दरअसल, इसके ट्रायल के नतीजों में पाया गया है कि वैक्सीन से ऐंटीबॉडी और वाइट ब्लड सेल- Killer-T-cells बनते हैं। इसमें ऐंटीबॉडी (IgG) पाई गई है जो वायरस के स्पाइक प्रोटीन को पहचानकर उससे अटैच हो जाती है और वायरस स्वस्थ्य कोशिकाओं को इन्फेक्ट नहीं कर पाता। वहीं, Killer T-cells ऐसे वाइट ब्लड सेल्स या Leukocytes होते हैं जो वायरस के इन्फेक्शन के शिकार हुई कोशिकाओं को पहचानकर उन्हें नष्ट कर देते हैं। ये दोनों साथ मिलकर शरीर को सुरक्षा देते हैं। ऐंटीबॉडी कुछ महीनों में खत्म भी हो सकती हैं लेकिन T-cells सालों तक शरीर में रहते हैं।

  • ​क्या अब आम लोगों को मिलने लगेगी?

    वैक्सीन के इंसानों पर इस पहले ट्रायल में सिर्फ 1077 लोग शामिल हुए थे। अभी तक के नतीजे सकारात्मक जरूर हैं लेकिन इनके आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि अभी इसे आम जनता को दिया जा सकता है। इसके लिए अगले दो चरणों में ब्रिटेन में 10 हजार, अमेरिका में 30 हजार, दक्षिण अफ्रीका में 2 हजार और ब्राजील में 5 हजार लोगों पर टेस्ट किया जाएगा। तीसरे चरण के नतीजे आने के बाद ही यह तय होगा कि इसे लोगों को दिया जा सकता है या नहीं।

  • कब तक आएगी वैक्सीन?

    पहले ट्रायल में सफल होने के बाद इसे इमर्जेंसी में इस्तेमाल करने की इजाजत मिल सकती है। ऐसे में हो सकता है कि अक्टूबर तक इसे उन लोगों को दिया जा सके जिन्हें ज्यादा खतरा है, जैसे हेल्थकेयर वर्कर्स। Astrazeneca का मानना है कि अगले साल की शुरुआत में पूरी तरह से अप्रूवल मिल सकता है। उसके बाद ही यह साफ होगा कि आम जनता तक यह कब पहुंचेगी और वैक्सिनेशन शुरू होगा। आमतौर पर वैक्सीन्स को बनने में 10-15 साल लग जाते हैं। ऐसे में अगर यह 2021 की शुरुआत तक इसे अप्रूवल मिल जाता है, तो यह भी अपने आप में बड़ी सफलता होगी।

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Web Title coronavirus vaccine updates japan and eu agreements with pfizer, biontech and sanofi for vaccine(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)

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