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COVID-19 का असर, 10 हजार से कम के फोन्स को लेकर छिड़ी ‘जंग’

(प्रतीकात्मक फोटो)(प्रतीकात्मक फोटो)

नई दिल्ली

COVID-19 महामारी के कारण यूजर्स की जेब पर काफी असर पड़ा है। स्मार्टफोन कंपनियां भी इस बात को समझ रही हैं। यही कारण है कि आजकल कंपनियां नए फोन्स की प्राइसिंग को लेकर काफी सजग हो गई हैं। इस वजह से कम कीमत वाले स्मार्टफोन सेगमेंट में कॉम्पिटिशन भी काफी बढ़ गया है। हाल के दिनों में कई ऐसे फोन लॉन्च हुए हैं, जो 10 हजार रुपये से कम की कीमत में आते हैं। कंपनियों को कोरोना काल में मौका मिला है कि वह हल्के स्पेसिफिकेशन और कम कीमत वाले डिवाइस लॉन्च करें। इससे जहां एक तरफ यूजर की जरूरत पूरी होगी, वहीं दूसरी तरफ कंपनियों को एंट्री लेवल सेगमेंट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का भी मौका मिलेगा।

सस्ते सेगमेंट में पकड़ मजबूत करने की कोशिश

सैमसंग ने कई सालों में पहली 5 हजार रुपये की आसपास की कीमत वाले स्मार्टफोन को मार्केट में लॉन्च किया है। वहीं रियलमी भी अपने सस्ते स्मार्टफोन्स की संख्या को बढ़ाना चाह रही है। इन कंपनियों की कोशिश है कि वह शाओमी और नोकिया की तरह 10 हजार रुपये से कम के सेगमेंट में अपनी पकड़ को मजबूत बना सकें।

ई-लर्निंग ने बढ़ाई सस्ते स्मार्टफोन्स की मांग

काउंटरपॉइंट के तरुण पाठक ने बताया, ‘ज्यादातक कंपनियां आजकल प्राइसिंग में बैकवर्ड इंटिग्रेशन को अपना रही हैं क्योंकि 10 हजार रुपये से कम की कैटिगरी में रिप्लेसमेंट की संभावनाएं अब ज्यादा हैं।’ तरुण ने आगे कहा कि यूजर्स की ई-लर्निंग की बढ़ती जरूरतों ने ब्रैंड्स को मौका दिया गै कि वे कम कीमत और हल्के स्पेसिफिकेशन्स वाले डिवासेज को बेच सकें।

कुछ सालों में काफी कम हुआ है मार्केट शेयर

बीते कुछ सालों में एंट्री लेवल सेगमेंट के स्मार्टफोन्स में तेजी से कमी आई है। इसकी वजह घटती मांग और ज्यादा डिस्ट्रीब्यूशन कॉस्ट रहे। काउंटरपॉइंट रिसर्च के मुताबिक साल 2017 में एंट्री लेवल सेगमेंट यानी की 5 हजार रुपये से कम वाले सेगमेंट की मार्केट में हिस्सेदारी 12 प्रतिशत थी, जो साल 2019 में घटकर 4 प्रतिशत हो गई थी। वहीं, 5 से 10 हजार रुपये के सेगमेंट के मार्केट शेयर 45 प्रतिशत से कम होकर 42 प्रतिशत पर पहुंच गया।

जरूरत पड़ने पर ही यूजर खरीद रहे नया फोन

कोविड-19 के कारण सस्ते स्मार्टफोन सेगमेंट को एक नया बूस्ट मिला है क्योंकि यूजर अब फोन खरीदते समय कम पैसे खर्च करना चाहते हैं और वह नया फोन तभी ले रहे हैं जब उन्हें इसकी वाकई में जरूरत पड़ रही है। इस कारण देसी स्मार्टफोन ब्रैंड जैसे माइक्रोमैक्स और लावा को मार्केट में री-एंट्री करने का शानदार मौका मिल गया है। इसके अलावा कोरिया की एलजी भी दुनिया के दूसरे सबसे बड़े स्मार्टफोन मार्केट में अपनी पकड़ को फिर से मजबूत करने की कोशिश में लग गया है।

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छोटे इंडियन ब्रैंड्स के लिए मुश्किल कम नहीं

ऐनालिस्ट्स का मानना है कि इस दौरान छोटे इंडियन ब्रैंड को फिर से परेशानी हो सकती है क्योंकि पहले ही चाइनीज ब्रैंड्स ने इनकी मार्केट हिस्सेदारी को घटाकर पिछले 5 सालों में 1 प्रतिशत कर दिया है। कैनालिस के रिसर्च ऐनालिस्ट अद्वैत मार्डिकर ने कहा, ‘अब तक एलजी, माइक्रोमैक्स, जियोनी, iTel, लावा के पास सस्ते स्मार्टफोन्स को लेकर कुछ उम्मीद बाकी थी, लेकिन इनके लिए टेक्नॉलजी में सुपीरियर ब्रैंड्स जैसे सैमसंग के सस्ते स्मार्टफोन्स को टक्कर देना मुश्किल हो सकता है।’ दूसरी तरफ सस्ते और मिड-रेंज स्मार्टफोन्स बनाने वाली कंपनियां जैसे वीवो, ओप्पो और शाओमी ने बीते कुछ महीनों में अलग ट्रेंड दिखाते हुए 40 हजार रुपये से ऊपर के सेगमेंट में एंट्री कर ली है।

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