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व्यावसायिक कोयला खनन से झारखंड को प्रति वर्ष 3200 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा: मंत्री

रांची, 30 जुलाई (भाषा) केन्द्रीय कोयला एवं खान तथा संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बृहस्पतिवार को यहां कहा कि व्यावसायिक कोयला खनन से आने वाले वर्षों में झारखंड में विकास का एक नया दौर शुरू होगा। उन्होंने कहा व्यावसायिक कोयला खनन के लिए झारखंड की जिन नौ कोयला खानों की नीलामी का प्रस्ताव है उनसे राज्य को प्रति वर्ष 3,200 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व प्राप्त होगा एवं राज्य के लोगों के लिए 50,000 से अधिक रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। एक दिवसीय यात्रा पर झारखंड पहुंचे केन्द्रीय कोयला एवं खान तथा संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी

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भाषा | Updated:

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रांची, 30 जुलाई (भाषा) केन्द्रीय कोयला एवं खान तथा संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बृहस्पतिवार को यहां कहा कि व्यावसायिक कोयला खनन से आने वाले वर्षों में झारखंड में विकास का एक नया दौर शुरू होगा। उन्होंने कहा व्यावसायिक कोयला खनन के लिए झारखंड की जिन नौ कोयला खानों की नीलामी का प्रस्ताव है उनसे राज्य को प्रति वर्ष 3,200 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व प्राप्त होगा एवं राज्य के लोगों के लिए 50,000 से अधिक रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। एक दिवसीय यात्रा पर झारखंड पहुंचे केन्द्रीय कोयला एवं खान तथा संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने यहां मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात के बाद एक वर्चुअल संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही। प्रह्लाद जोशी ने कहा कि व्यावसायिक कोयला खनन आने वाले वर्षों में झारखंड में विकास का एक नया दौर शुरू करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘व्यावसायिक कोयला खनन के लिए झारखंड की 09 कोयला खदानें आवंटन हेतु प्रस्तावित की गई हैं, जिनसे राज्य को प्रति वर्ष 3,200 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व प्राप्त होगा। साथ ही, राज्य के लोगों के लिए 50,000 से अधिक रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।’’ उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त राज्य को जिला खनिज कोष (डीएमएफ) मद में भी प्रति वर्ष 17 करोड़ रुपए मिलेंगे, जिसका उपयोग कोलफील्डस के आस-पास के क्षेत्रों के समावेशी विकास में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक कोल खनन के केन्द्र सरकार के प्रस्ताव पर बहुत ही अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है और निवेशकों ने इस क्षेत्र में जबर्दस्त उत्सुकता दिखायी है। विशेषकर झारखंड में आवंटन के लिए प्रस्तावित लगभग सभी खदानों में 05 से 10 आवेदक आवंटन हेतु आगे आए हैं। इससे राज्य को कई मायनों में लाभ पहुंचेगा और राज्य की प्रगति का नया अध्याय लिखा जाएगा। जोशी ने व्यावसायिक कोयला खनन शुरू करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भारत को अपनी सालाना कोयला जरूरतों का लगभग 20 प्रतिशत कोयला आयात करना पड़ता है। व्यावसायिक कोयला खनन के शुरू होने के बाद स्वतंत्र एवं कैप्टिव तापीय बिजली घरों द्वारा किए जाने वाले कोयला आयात को घरेलू कोयले की आपूर्ति से समाप्त किया जा सकेगा, जिससे सालाना लगभग 30,000 करोड़ रुपए के आयात बिल की बचत होगी। साथ ही, इससे 03 लाख से अधिक कामगारों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि गत 04 वर्षों में प्रति वर्ष लगभग 4000 करोड़ रुपए, यानी 16,000 करोड़ रुपए का कुल राजस्व इन कोयला कंपनियों से राज्य को प्राप्त हुआ है। इन कोयला कंपनियों की होल्डिंग कंपनी, कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल), अपनी कुल देय रॉयल्टी का लगभग 30 प्रतिशत अकेले झारखंड को भुगतान करती है, जबकि कोल इंडिया के कुल कोयला उत्पादन में राज्य की लगभग 20 प्रतिशत ही हिस्सेदारी है।इससे पूर्व अपने रांची दौरे के दौरान जोशी ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की और उनके साथ राज्य में खनन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर मंत्रणा की। साथ ही, उन्होंने कोयला कंपनियों- ईस्टर्न कोलफील्डस लिमिटेड (ईसीएल), भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) एवं सेंट्रल कोलफील्डस लिमिटेड (सीसीएल) के प्रदर्शन की समीक्षा की और मौजूदा महामारी के बीच भी देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में कोल योद्धाओं द्वारा किए जा रहे कठिन परिश्रम की सराहना की। बैठक में कोयला मंत्रालय के सचिव अनिल कुमार जैन, कोल इंडिया के अध्‍यक्ष प्रमोद अग्रवाल, सीसीएल के प्रबंध निदेशक गोपाल सिंह, सीएमपीडीआई के प्रबंधन निदेशक शेखर शरण सहित निदेशकगण एवं अन्‍य अधिकारीगण उपस्थित थे।

Web Title jharkhand will get revenue of rs 3200 crore per year from commercial coal mining(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)

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