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IPL amid covid 19: यूएई में IPL- फ्रैंचाइजियों के पास ढेरों सवाल, लेकिन कुछ जवाब – ipl 2020 in uae franchises have too many questions few answers

Edited By Arun Kumar | टाइम्स न्यूज नेटवर्क | Updated:

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हाइलाइट्स

  • BCCI ने किया IPL शेड्यूल का ऐलान लेकिन फ्रैंचाइजियों को नहीं जरूरी जानकारी
  • टूर्नमेंट से पहले होनी है गवर्निंग काउंसिल की मीटिंग अभी तक तारीख तय नहीं
  • टूर्नमेंट में टीमों के मैचों का क्या है पूरा शेड्यूल, अभी तक यह भी नहीं मालूम
  • रेवन्यू शेयरिंग पर क्या होगा हिसाब-किताब, टीम मालिकों को इसकी भी चिंता

के. श्रीनिवास राव, मुंबई

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) अब यूएई जा रहा है। इस बात पर बीसीसीआई (BCCI) के आला अधिकारी भी मुहर लगा चुके हैं। 19 सितंबर से 8 नवंबर के बीच यह लीग खेली जाएगी। हालांकि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने कुछ बातें अभी तक फ्रैंचाइजी से साझा नहीं की हैं, जिसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। बोर्ड को अब अपनी बातें बतानी शुरू कर देनी चाहि।

फ्रैंचाइजियों को अभी तक बोर्ड की ओर से ‘आधिकारिक’ रूप से इस सीजन को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है। इस वजह से उनके बीच कुछ चिंताएं हैं। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने टीम मालिकों और अधिकारियों से इस बारे में बात की और उनकी चिंताएं जानने की कोशिश की।

कब है आईपीएल गर्वनिंग काउंसिल और फ्रैंचाइजी की बैठक

आईपीएल गर्वनिंग काउंसिल की बैठक कब है और बीसीसीआई कब सभी फ्रैंचाइजी की बैठक बुलाना चाहता है? चूंकि जब तक सब एक राय नहीं होंगे तब तक बात आगे नहीं बढ़ पाएगी। और उसके लिए पूरा संवाद होना जरूरी है। फ्रैंचाइजी का कहना है कि इस मामले में पहले ही काफी देरी हो चुकी है।

तारीखो, मैदान और मैच-शेड्यूल की आधिकारिक पुष्टि

टीम और उनके मालिक अभी स्पॉन्सर्स के साथ बातचीत में लगे हैं। ज्यादातर स्पॉन्सर्स के साथ फरवरी में बातचीत हो चुकी थी। उस समय आईपीएल मार्च में शुरू होना था। हालांकि तब से लेकर अब तक काफी बदलाव हो चुके हैं। इस बार की लीग भारत के बाहर हो रही है। सितंबर-नवंबर में हो रही है। खाली मैदानों में होगी। ऐसे में स्पॉन्सरशिप को लेकर फिर से सौदेबाजी होगी। फ्रैंचाइजियों का कहना है कि स्पॉन्सर्स को कई बातों की डीटेल में जानकारी देनी होगी ताकि चीजों को नए सिरे से प्लान किया जा सके। इसमें टेलीविजन एक्सपोजर, प्राइम-टाइम कन्जमशन और ब्रॉन्ड्स के लिए स्क्रीन टाइम भी मायने रखता है।

रेवेन्यू शेयरिंग

अभी तक के कार्यक्रम के हिसाब से सभी 60 मैच होंगे। इसके लिए 51 दिन का आईपीएल विंडो भी तय किया गया है। ऐसे में टीम मालिकों को सेंट्रल पूल से रेवेन्यू शेयरिंग की उम्मीद है। इसमें प्रसारण अधिकार से होने वाली कमाई भी शामिल है। उस कमाई में कोई खास फर्क पड़ने वाला नहीं है। इसके साथ ही हर आईपीएल फ्रैंचाइजी को हर मैच से करीब 2.5 से 3.5 करोड़ रुपये तक का गेट रेवेन्यू (दर्शकों से होने वाली कमाई) का नुकसान हो सकता है। यह नुकसान पूरे सीजन में करीब 20-25 करोड़ रुपये होगा। क्या बीसीसीआई इसकी भरपाई करेगी। इसके साथ ही भारत में होटल बुकिंग वगैरहा भी सस्ती पड़ती है। यूएई फ्रैंचाइजी के लिए थोड़ा ज्यादा महंगा साबित होगा। एक हिसाब लगाएं तो आईपीएल के दौरान यूएई में करीब 60 हजार रूम नाइट बुक करेगा। क्या रेवेन्यू में इसका हिसाब लगाया जाएगा।

प्लेयर्स-संबंधी जानकारी

खिलाड़ियों को लेकर भी फ्रैंचाइजियों के मन में काफी सवाल हैं। प्लेयर्स को यूएई् लेकर जाना और वापस लाना। प्लेयर्स के परिवार को लेकर जाना, विदेशी खिलाड़ियों को यूएई लेकर जाना और वापस लाना, किसी खिलाड़ी की गैर-मौजूदगी में रिप्लेसमेंट लाना, मेडिकल कारणों से किसी खिलाड़ी का अनुपलब्ध होना, टूर्नमेंट के दौरान लोन लिए गए खिलाड़ी। यूएई में आईसोलेशन संबंधी नियम। रोजमर्रा के नियमों का पालन करना। ये कई सवाल हैं जो फ्रैंचाइजी मालिकों के जेहन में हैं। वे इनके सवाल बोर्ड से चाहते हैं। टीम मालिक जानते हैं कि खिलाड़ियों को यूएई लेकर जाना और वापस लाना उनकी जिम्मेदारी है लेकिन इसे वह तभी अमली जामा पहना सकता हैं जब बीसीसीआई अपनी पॉलिसी स्पष्ट करे।

बायो सिक्योर बबल

सबसे जरूरी बात सबकी सुरक्षा है। बीसीसीआई सबकी खास तौर पर खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए क्या नीति बना रही है। फ्रैंचाइजियां इस बीच अपना प्लान बना रही हैं। उन्होंने अपने स्टाफ को क्वॉरनटीन में भेज दिया है। अपने मेडिकल स्टाफ को तैयार रखा है। टीम प्रबंधन के साथ जानकारी साझा कर रहे हैं। खिलाड़ियों को नियमित रूप से इसकी जानकारी दे रहे हैं। इसके साथ सेनेटाइजेशन, स्वच्छता आदि के बारे में जागरूक कर रहे हैं। फ्रैंचाइजी जानते हैं कि गलती की कोई गुंजाइश नहीं है और एक गलती से पूरी लीग पर इसका असर पड़ सकता है।

यह भी है समस्या

आईपीएल को यूएई लेकर जाना लॉजिस्टिक के लिहाज से भी काफी बड़ा काम है। आयोजक भी इस बात को समझते हैं। बीसीसीआई के ऐंटी-करप्शन यूनिट के मुखिया अजीत सिंह का कहना है कि इस बार लीग को मॉनीटर करना थोड़ा आसान होगा क्योंकि यह लीग सिर्फ तीन मैदानों पर ही खेली जाएगी। उन्होंने कहा, ‘यूएई में एसीयू का काम करना आसान होगा। भारत के आठ मैदानों के मुकाबले वहां सिर्फ तीन मैदानों में होंगे। यह कोई समस्या की बात नहीं है। एक बार शेड्यूल आ जाए उसके बाद हम वर्कफोर्स तय करेंगे।’

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