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Corona Vaccine का इंसानों पर सबसे बड़ा ट्रायल शुरू, 30 हजार लोगों पर टेस्ट Moderna की वैक्सीन

Coronavirus Vaccine in US: अमेरिका में कोरोना वायरस की Moderna Inc की वैक्सीन का सबसे बड़ा ट्रायल शुरू हो गया है। इसे 30 हजार वॉलंटिअर्स को दिया गया है। अमेरिका हर संभावित वैक्सीन का इलाज कर रहा है।

Edited By Shatakshi Asthana | एपी | Updated:

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वॉशिंगटन

दुनिया की सबसे बड़ी COVID-19 वैक्सीन स्टजी सोमवार से शुरू हो गई है। इसमें 30 हजार लोगों को Moderna Inc की बनाई वैक्सीन दी गई। यह वैक्सीन उन चुनिंदा कैंडिडेट्स में से है जो कोराना वायरस से लड़ने की रेस के आखिरी चरण में हैं। नैशनल इंस्टिट्यूट्स ऑफ हेल्थ ऐंड और मॉडर्ना इंक की बनाई एक्सपेरमेंटल वैक्सीन वायरस से बचाव कर पाएगी इसकी फिलहाल कोई गारंटी नहीं है। इसलिए यह स्टडी की गई है।

ऐसे की जा रही स्टडी

वॉलंटिअर्स को यह नहीं बताया गया है कि उन्हें असली दवा दी जा रही है या डमी। दो डोज देने के बाद उन्हें मॉनिटर किया जाएगा। यह देखा जाएगा कि कि कौन से ग्रुप को इन्फेक्शन होत है। यह स्टडी खासकर ऐसे इलाकों में की गई है जहां अभी भी तेजी से वायरस फैल रहा है। Moderna की पहली स्टेज की स्टडी में 45 वॉलंटिअर्स पर वैक्सीन का असर देखा गया था। इसमें वॉलंटिअर्स के इम्यून सिस्टम में बचाव पैदा हुआ था। बुखार और दर्द जैसे मामूली साइड इफेक्ट्स भी पाए गए थे।

हर वैक्सीन टेस्ट कर रहा अमेरिका

अमेरिका चाहता है कि देश में इस्तेमाल होने वाली वैक्सीन का टेस्ट वह खुद करे। हर महीने एक कैंडिडेट का 30 हजार वॉलंटिअर्स पर टेस्ट होगा। इस टेस्ट में यह भी देखा जाएगा कि ये वैक्सीन कितनी सुरक्षित हैं। इसके बाद वैज्ञानिक इन वैक्सीनों की तुलना करेंगे। अगले महीने Oxford की वैक्सीन का टेस्ट होगा और फिर सितंबर में Johnson & Johnson, अक्टूबर में Novavax की स्टडी होगी। Pfizer Inc. अपने आप 30 हजार वॉलंटिअर्स पर स्टडी करेगा।

चिंपैंजी के वायरस से बनी वैक्सीन

  • चिंपैंजी के वायरस से बनी वैक्सीन

    ऑक्सफर्ड में कोरोना वैक्सीन बनाने में चिंपैंजी के एडीनो वायरस यानी सर्दी जुकाम करने वाले वायरस का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह नुकसान इसलिए नहीं करेगा क्योंकि इसको काफी कमजोर कर दिया गया है। इसमें वेक्टर (वाहक) को चिंपैंडी के एडीनो वायरस (ChAdOx1) से लिया गया है। जब यह ChAdOx1 किसी व्यक्ति के शरीर में जाएगा तो एक खास तरह का प्रोटीन बनाएगा। और इसके बाद मानव शरीर में कोरोना से लड़ने वाली ऐंटीबॉडीज पैदा हो जाएंगी।

  • लंबे समय तक रहेगी असरदार?

    लैंसेट की रिपोर्ट के मुताबिक जिन लोगों पर भी वैक्सीन का ट्रायल किया गया उनपर सकारात्मक असर पड़ा है। देखा गया कि एक डोज देने के बाद ही शरीर में एंटीबॉडीज बनने लगीं और टी-शेल भी बन गईं। दरअसल टी- शेल लंबे समय तक काम करती हैं और दोबारा इन्फेक्शन होने पर फिर से वायरस से लड़ने को तैयार हो जाती हैं।

  • ऐसे करता है काम

    पहले चरण में कोरोना वायरस स्पाइक प्रोटीन का जेनेटिक कोड पहचाना गया। दूसरे चरण में चिंपैंजी के एडीनोवायरस को जेनेटिकली मोडिफाइ करके स्पाइक प्रोटीन बनाए जाते हैं। शरीर में जाने के बाद यह प्रोटीन कोरोना की एंटीबॉडी बनाने लगती हैं।

  • ​क्या साइड इफेक्ट भी हुए?

    वैक्सीन के ट्रायल के बाद लोगों पर कुछ साइड इफेक्ट देखने को मिले जैसे बुखार, सिरदर्द, और इंजेक्शन वाली जगह पर रिऐक्शन जैसी चीजें देखने को मिली हैं। हालांकि इसका असर ज्यादा नहीं था और खुद ही ठीक हो गईं।

तीन वैक्सीनों पर नजर

अमेरिका की Moderna Inc की mRNA 1273 वैक्सीन के अलावा Oxford University के जेनर इंस्टिट्यूट की वैक्सीन AZD1222 भी इंसानों पर पहले चरण के ट्रायल में सफल रही है। इसे दिए जाने पर वॉलंटिअर्स में ऐंटीबॉडी और Killer T-cells पाए गए हैं। ऑक्सफर्ड की वैक्सीन क उत्पादन भारत में करने के लिए Serum Institute of India ने AstraZeneca के साथ डील की है। वहीं, चीन की CanSino की वैक्सीन ने भी इंसानों पर आखिरी चरण में जाने का दावा किया है।

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सांकेतिक तस्वीर

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Web Title moderna coronavirus vaccine tested in biggest human trial involving 30 thousand volunteers(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)

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