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ईएमआई में छूट अब और न दी जाए, एचडीएफसी चेयरमैन की रिजर्व बैंक से गुहार

Edited By Deepak Verma | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

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हाइलाइट्स

  • आरबीआई से ईएमआई चुकाने की मोहलत अब न बढ़ाने की गुहार
  • HDFC चेयरमैन ने कहा कि कुछ लोग उठा रहे हैं इसका गलत फायदा
  • फिलहाल 31 अगस्त, 2020 तक है ईएमआई न चुकाने की छूट
  • आरबीआई के इस कदम से बैंक के कर्जदारों को मिली थी बड़ी राहत

नई दिल्‍ली

एचडीएफसी चेयरमैन दीपक पारेख ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से मोराटोरियम न बढ़ाने की मांग की है। पारेख का मानना है जो लोग कर्ज चुका सकते हैं, वे भी हालात का फायदा उठा रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि इससे कर्जदाताओं पर दबाव बढ़ रहा है। पारेख से पहले स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) चेयरमैन रजनीश कुमार भी यही मांग कर चुके हैं। उन्‍होंने सुझाव दिया कि रिजर्व बैंक लोन रीस्‍ट्रक्‍चरिंग की परमिशन दे नहीं तो बैड लोन्‍स बढ़ सकते हैं। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि वह पारेख के सुझावों पर विचार करेंगे। अगर ऐसा होता है तो 31 अगस्‍त के बाद कर्ज चुकाने से मिली छूट हट सकती है।

मोराटोरियम बढ़ा तो हमें नुकसान होगा : पारेख

पारेख ने दास से अपील करते हुए, “प्‍लीज मोराटोरियम मत बढ़ाइए क्‍योंकि हम देख रहे हैं कि जो लोग (कर्ज) चुकाने में समर्थ हैं, चाहे वे इंडिविजुअल्‍स हों या कॉर्पोरेट्स, वे मोराटोरियम का फायदा उठा रहे हैं और पेमेंट टाल रहे हैं। ऐसी कुछ चर्चा है कि मोराटोरियम तीन महीनों के लिए और बढ़ाया जा सकता है जिससे हमें नुकसान होगा और खासतौर से छोटे NBFCs को।” जवाब में दास ने कहा कि “मैंने सुझाव नोट कर लिए हैं लेकिन मैं उनपर अभी कुछ नहीं कह सकता।”

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SBI चेयरमैन ने भी कहा था, अब जरूरत नहीं

हाल ही में, एसबीआई चेयरमैन ने भी कहा था कि अगस्‍त के बाद से कर्ज के भुगतान में राहत की जरूरत नहीं है। 10 जुलाई को एक कॉन्‍क्लेव में रजनीश कुमार ने कहा था कि ‘RBI के पास पूरे वित्‍तीय सिस्‍टम का डेटा है और वे उसी के आधार पर फैसला करेंगे लेकिन अगर आप मुझसे पूछिए तो मोराटोरियम की और जरूरत नहीं है।”

30% कर्ज मोराटोरियम में

रिजर्व बैंक ने मार्च में तीन महीने के मोराटोरियम का ऐलान किया था। उसका फायदा उठाने वालों की क्रेडिट रेटिंग में भी कोई बदलाव नहीं होना था। कोविड महामारी के समय में लोगो को राहत देने के लिए बाद में इसे तीन महीने के लिए और बढ़ा दिया गया था। केंद्रीय बैंक का डेटा दिखाता है कि अप्रैल खत्‍म होने तक, बैंकिंग सेक्‍टर के टोटल लोन का आधा मोराटोरियम के तहत था। हालांकि जून तक यह घटकर 30% आ गया था।

सांकेतिक तस्‍वीर।

सांकेतिक तस्‍वीर।

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