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हफ्ते के पांच अच्छे लेख जो सत्याग्रह पर नहीं हैं – Ameta

1– भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के बीच पूर्वी लद्दाख में पीछे हटने (डिसइंगेजमेंट) की प्रक्रिया में गतिरोध आ गया है. गलवान घाटी से पीछे हटा चीन देपसांग और पैंगोग त्सो इलाके में इस तरह की कवायद के लिए तैयार नहीं है. बल्कि वह तो इसे अपना इलाका बता रहा है. इस पूरे मुद्दे को लेकर द प्रिंट पर ले. जनरल (सेवानिवृत्त) एचएस पनाग की टिप्पणी.

अड़ियल चीन के लिए भारत के पास मौजूद दो विकल्पों में से बेहतर है लड़ाई को उसके खेमे में ले जाना

2-इस्तांबुल के मशहूर हागिया सोफ़िया संग्रहालय को राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोआन फिर से मस्जिद बना चुके हैं. इसे तुर्की के हालिया अतीत की कुछ और घटनाओं के साथ मिलाकर देखा जाए तो संकेत मिलता है कि इस देश का नेतृत्व उस्मानी यानी ऑटोमन साम्राज्य का खोया रसूख वापस हासिल करने का सपना देख रहा है. बीबीसी हिंदी पर रजनीश कुमार की रिपोर्ट.

तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन का इस्लामिक राष्ट्रवाद कैसे फैलाया जा रहा है?

3-इसी हफ्ते मशहूर शिकारी जिम कॉर्बेट का जन्मदिन गुजरा. लेकिन वे सिर्फ शिकारी नहीं थे. डॉयचे वेले हिंदी पर अपने इस लेख में हृदयेश जोशी बता रहे हैं कि शिकारी से संरक्षक बने जिम कॉर्बेट की भविष्यवाणी सिर्फ बाघ या वन्य जीवों के लिए ही नहीं पूरे हिमालय के लिए गंभीर चेतावनी लगती है.

हिमालय में जगह जगह गूंजती है कॉर्बेट की चेतावनी

4-बीती 20 जुलाई को राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के किसानों ने सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए तीन कृषि अध्यादेशों के विरोध में प्रदर्शन किया. उधर, अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने इन अध्यादेशों के खिलाफ नौ अगस्त को देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है. इस मुद्दे को लेकर न्यूजलॉन्ड्री हिंदी पर धीरज मिश्रा की रिपोर्ट.

क्यों किसान मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि अध्यादेशों का विरोध कर रहे हैं

5-इस हफ्ते अमला शंकर नहीं रहीं. मशहूर नर्तक उदय शंकर की पत्नी अमला ने कोलकाता स्थित उनके नृत्य संस्थान में करीब आधी सदी तक उनकी नृत्य शैली को जीवित रखा था. इस कम चर्चित शख्सियत की जिंदगी की एक झलक देता काफल ट्री पर अशोक पांण्डे का लेख.

अमला शंकर खामोशी से इस दुनिया से विदा हो गईं

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