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पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए छात्र ने सुबह चार बजे उठकर धोयी कार, 12वीं में आए 91.7 %

पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए छात्र ने सुबह चार बजे उठकर धोयी कार, 12वीं में आए 91.7 %

परमेश्वर ने 10वीं कक्षा में ही खानपुर में कारों की धुलाई का काम करना शुरू कर दिया था.

नई दिल्ली:

दिल्ली की एक झुग्गी के 2 तंग कमरों में नौ लोगों के साथ रहना परमेश्वर के जीवन की हकीकत थी. फिर भी, 17 वर्षीय परमेश्वर ने बड़ी कठिनाइयों का सामना किया और अपनी CBSE कक्षा 12वीं की परीक्षाओं में 91.7 प्रतिशत अंक हासिल किए. परमेश्वर की जीत विपरीत परिस्थितियों में साहस की कहानी है. 

तिगरी की झुग्गी के अपने घर में परमेश्वर के लिए भूख एक आम बात थी. भूख से परमेश्वर का शरीर भी जैसा सूख सा गया था. परमेश्वर ने 10वीं कक्षा में ही खानपुर में कारों की धुलाई का काम करना शुरू कर दिया था. जिससे उन्हें एक महीने में 3,000 रुपये मिलते. इन्हीं पैसों से उन्होंने अपनी वर्दी और किताबों का खर्च उठाया. कड़ाके की सर्दियों में भी परमेश्वर सुबह 4 बजे उठ अपने काम पर पहुंचने के लिए आधे घंटे तक पैदल चलता. वह ढाई घंटे में लगभग 10-15 कारों को धोता. परमेश्वर ये काम सप्ताह में छह दिन करता. 

परमेश्वर ने बताया, “मेरे लिए ठंड में जागना और काम करना आसान नहीं था. मुझे याद है कि ठंडे पानी को छूने पर मेरे हाथ हर 5 मिनट में कैसे जम जाते थे. मेरी उंगलियां सुन्न हो जाया करती थीं. लोग मुझे डांटते भी थे और कुछ सौ रुपये के लिए मुझे अपमान भी सहना पड़ता था.”  और फिर वे काम करते गए. परमेश्वर ने बताया कि उन्हें अपनी पढ़ाई के लिए नौकरी की जरूर थी. उनके 62 वर्षीय पिता दिल के मरीज हैं और उनके भाई की नौकरी से भी परिवार की पूरी देखभाल नहीं हो पाती है. परमेश्वर ने कहा,”मैं उन पर बोझ नहीं बन सकता था.” 

इसके बाद भी उनकी बाधाएं खत्म नहीं हुईं. मार्च में उनके पिता की सर्जरी हुई. परमेश्वर अपने पिता के साथ अस्पताल में थे जहां उन्होंने अपने हिंदी के इम्तहान की तैयारी की. इस कठिन समय में, एक गैर सरकारी संगठन, आशा सोसाइटी ने परमेश्वर की मदद की. उन्होंने सैंपल पेपर मुहैया कराए और परमेश्वर को दिल्ली विश्वविद्यालय में अंग्रेजी ऑनर्स पाठ्यक्रम के लिए ऑनलाइन आवेदन करने में मदद की. 

परमेश्वर का कहना है कि वह भविष्य में शिक्षक बनना चाहते हैं. परमेश्वर ने कहा,”मैं इतना ज्ञान हासिल करना चाहता हूं कि मैं दूसरों की भी मदद कर सकूं. कई ऐसे हैं जिनके पास पढ़ाई करने या ट्यूशन लेने के लिए कोई साधन नहीं हैं …” . उनके परिवार का कहना है कि उन्हें परमेश्वर से बहुत उम्मीदें हैं और वह उनके इस सफर में उनका साथ देंगे. 

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