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BRI-आर्थिक गलियारा: क्या पाकिस्तान में तख्तापलट कराना चाहते हैं चीन के राष्ट्रपति?

Edited By Shatakshi Asthana | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

चीन के पहले क्रूर शासक की याद दिलाते हैं राष्ट्रपति शी जिनपिंगचीन के पहले क्रूर शासक की याद दिलाते हैं राष्ट्रपति शी जिनपिंग
हाइलाइट्स

  • चीन और पाकिस्तान के बीच CPEC के पीछे क्या वजह
  • एक्सपर्ट का मानना है BRI के पीछ जिनपिंग का प्लान
  • पाकिस्तान की सत्ता पर अपना कंट्रोल चाहता है चीन
  • CPEC अथॉरिटी के तहत बेहिसाब ताकत हासिल की

पेइचिंग

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को लेकर अक्सर दावा किया जाता है कि वह पूरी दुनिया पर चीन का राज चाहते हैं। उनके बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव (BRI) को इसी योजना का हिस्सा माना जाता है। चीनी मामलों के एक एक्सपर्ट का दावा है कि इसी सपने को पूरा करने की कड़ी में जिनपिंग पाकिस्तान के लोकतांत्रिक और लोकसेवकों के हटाकर खुद देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर कब्जा जमाना चाहते हैं।

चीन के हाथ में हो ताकत

एशियाटाइम्स के लिए अली सलमान ने एक रिपोर्ट में दावा किया है कि 2016 के बाद से ही कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के जनरल सेक्रटरी शी जिनपिंग ने सरकार पर दबाव डाला है कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को लागू करने और मॉनिटर करने में योजना मंत्रालय की भूमिका को खत्म किया जाए।

शी ने ऐसी अथॉरिटी बनाने को कहा जो संविधान से अलग है और जो इन्फ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा-उत्पादन के प्रॉजेक्ट को सीधे शी के हाथों में सौंप दे।

जनता के हाथ में न हों फैसले

इस प्रस्ताव को तब खारिज कर दिया गया था लेकिन एक बार फिर पिछले साल इमरान खान के सामने इसे पेश किया गया। अली सलमान का कहना है कि चीन के लिए इमरान से योजना मंत्रालय की जिम्मेदारी और आगे चलकर पूरा देश अपने हाथ में लेना आसान है। अली सलमान का कहना है कि मंत्रालय के सीनियर ब्यूरोक्रैट आसानी से शी की स्कीम को समझकर उसके खिलाफ खड़े हो सकते हैं क्योंकि उनके हाथ सभी सीक्रेट दस्तावेज लग सकते हैं। वे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से फैसले लेने की प्रक्रिया में भी शामिल होते हैं। आम लोगों, जनप्रतिनिधियों और सिविल सर्वेंट्स के हाथों में कंट्रोल होने से सी के मास्टरप्लान पर सवाल उठते। इसलिए इन्हें ही रास्ते से हटा देने से शी का काम आसान हो सकता है।

बिना संसद की मंजूरी बनी CPEC अथॉरिटी

रिपोर्ट के मुताबिक यह समझौता इतना ज्यादा सीक्रेट था कि इसे सीनेट स्टैंडिंग कमिटी ऑन फाइनैंस को भी दिखाने से मना कर दिया गया। इसके बाद इस बात का अंदाजा लगाया जा रहा है कि आखिर यह कितना गोपनीय होगा। पिछले साल अक्टूबर में CPEC अथॉरिटी बिना संसद की मंजूरी के राष्ट्रपति के अध्यादेश के साथ ही 4 महीने के लिए पास कर दी गई और 4 महीने के लिए विस्तार दिया गया लेकिन शी को पूरा कंट्रोल चाहिए ताकि संविधान से भी ज्यादा शक्तिशाली बनाया जा सके।

…तो पाकिस्तान के पीएम, राष्ट्रपति भी जद में

चार महीने पहले एक जांच में पता चला कि पाकिस्तान में दो बड़े कोयले के ऊर्जा प्रॉजेक्ट जो CPEC के तहत बने थे, उनमें गलत ब्याज दिखाकर भ्रष्टाचार किया गया था और करीब 226 मिलियन अमेरिकी डॉलर का चूना लगाया गया था। CPEC अथॉरिटी CPC से जुड़े हर पहलू की जिम्मेदार होगी और इसके पास ऐसे किसी भी अधिकारी, यहां तक कि पाकिस्तान के पीएम या राष्ट्रपति तक, के खिलाफ जांच करने या जुर्माना लगाने का अधिकार होगा या कोई शख्स जो अथॉरिटी के निर्देशों को नजरअंदाज करेगा, उस पर भी कार्रवाई की जा सकेगी।

छोटे देशों को जाल में फंसा रहे शी

सलमान का कहना है कि शी बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव के किसी भी पहलू का विरोध या उस पर सवाल खड़े होते नहीं देखना चाहते हैं। उन्हें पता है कि जिन देशों में BRI खड़ा हो रहा है, अगर वहां के लोगों को उनकी स्कीम पता चल गई तो 2050 तक दुनिया के ज्यादातर लोगों को चीन की हुकूमत में लाना आसान नहीं होगा। सलमान ने यह बी बताया है कि पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे देशों को चीन कर्ज के जाल में फंसा रहा है। वह फॉरन-एक्सचेंज रिजर्व में कमी पैदा करके पाकिस्तान और दूसरी अर्थव्यवस्थाओं में जहर घोल रहा है। आखिर में इन देशों को राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में चीन की सत्ता स्वीकारनी पड़ सकती है।

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