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अफगानिस्तान में 6000 पाकिस्तानी आतंकी सक्रिय, यूएन रिपोर्ट से हुआ खुलासा

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हाइलाइट्स

  • पाकिस्तान के करीब 6,000-6,500 आतंकवादी पड़ोसी अफगानिस्तान में सक्रिय, यूएन की रिपोर्ट में खुलासा
  • अफगानिस्तान को अस्थिर करने के लिए आतंकी संगठनों का मददगार है पाकिस्तान, कई बार नकार चुका है आरोप
  • काबुल समेत अफगानिस्तान के कई हिस्सों में हाई प्रोफाइल हमले करने में सक्षम हैं ये आतंकी संगठन

न्यूयॉर्क

अफगानिस्तान को अस्थिर करने में पाकिस्तान की भूमिका पर बार-बार सवाल खड़े किए जाते रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान ने हर बार इसे गलत बताकर खारिज किया है। अब संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान के करीब 6,000-6,500 आतंकवादी पड़ोसी अफगानिस्तान में सक्रिय हैं। इनमें से अधिकतर आतंकियों के संबंध तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान से है।

संयुक्त राष्ट्र ने जारी की विस्तृत रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र की आईएसआईएस, अल-कायदा और संबंद्ध व्यक्तियों एवं संस्थाओं की विश्लेषणात्मक सहायता एवं प्रतिबंध निगरानी टीम की 26वीं रिपोर्ट में कहा गया कि अल-कायदा (एक्यूआईएस) तालिबान के तहत अफगानिस्तान के निमरूज, हेलमंद और कंधार प्रांतों से काम करता है। इसमें कहा गया है कि इस संगठन में बांग्लादेश, भारत, म्यामांर और पाकिस्तान से 150 से 200 के बीच सदस्य हैं। एक्यूआईएस का मौजूदा सरगना ओसामा महमूद है…जिसने मारे गए आसिम उमर की जगह ली है।

ओसामा की मौत का बदला लेने की फिराक में अल कायदा

रिपोर्ट के अनुसार, खबरें हैं कि एक्यूआईएस अपने पूर्व सरगना की मौत का बदला लेने के लिए क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई की साजिश रच रहा है। अफगानिस्तान में मौजूद सबसे बड़े आतंकवादी संगठन, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने पाकिस्तान में कई हाई प्रोफाइल हमलों की जिम्मेदारी ली है। इसके अलावा इस आतंकी संगठन ने जमात-उल-अहरार और लश्कर-ए-इस्लाम द्वारा किए गए अन्य हमलों में मदद भी की है।

अफगानिस्तान में 6500 पाकिस्तानी आतंकी सक्रिय

इसमें कहा गया कि टीटीपी के कई पूर्व आतंकवादी इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड द लैवेंट खुरासान (आईएसआईएल-के) में शामिल हो गए हैं। यूएन के सदस्य राष्ट्रों को आशंका है कि संगठन और इसके विभिन्न छोटे-मोटे समूह आईएसआईएल-के के साथ खुद को संबद्ध कर लेंगे। रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान में कुल पाकिस्तानी विदेशी आतंकवादी लड़ाकों की संख्या करीब 6,000 से 6,500 के बीच है, जिनमें से ज्यादातर का संबंध टीटीपी के साथ है और यह दोनों देशों के लिए खतरा पैदा करता है।

तालिबान के अंदर काम करते हैं कई आतंकी संगठन

यूएन की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस्तान में कई अन्य आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं जिनमें से ज्यादातर तालिबान के तहत काम करते हैं लेकिन कुछ आईएसआईएल-के के साथ संबद्ध हैं। जिसमें अल-कायदा 12 अफगान प्रांतों में गुप्त रूप से सक्रिय है और इसका सरगना आयमान अल-जवाहिरी देश में अड्डा डाले हुए है। निगरानी टीम का अनुमान है कि अफगानिस्तान में अल-कायदा लड़ाकों की कुल संख्या 400 से 600 के बीच है।

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2000 से ज्यादा आईएस आतंकी भी सक्रिय

निगरानी टीम का यह भी अनुमान है कि अफगानिस्तान में आईएसआईएल-के के मौजूदा सदस्यों की संख्या 2,200 है। इसका सरगना शेख मतिउल्ला कमाहवाल है जो पूर्व में कुनार में आईएसआईएल-के का सरगना था। इसके अलावा सीरियाई नागरिक अबु सईद मोहम्मद अल खुरासानी और शेख अब्दुल ताहिर भी शीर्ष पदों पर काबिज हैं। टीम को सूचित किया गया कि आईएसआईएल के दो वरिष्ठ कमांडर, अबु कुतैबह, और अबु हजर अल-इराकी पश्चिम एशिया से अफगानिस्तान पहुंचे। रिपोर्ट में कहा गया कि आईएसआईएल- के को कुनार में लगातार नुकसान हो रहा है जहां वह 2019 के अंत में नांगरहार प्रांत छोड़कर पहुंचा था।

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अफगान विशेष बलों ने कई आतंकियों को दबोचा

अप्रैल और मई में, अफगान विशेष बलों ने देशव्यापी अभियान चलाए जिससे आईएसआईएल-के का मुखिया असलम फारुकी, उसका पूर्ववर्ती जिया उल हक और अन्य वरिष्ठ सदस्यों समेत संगठन के कई नेताओं को गिरफ्तार किया जा सका था। कुछ सदस्य राष्ट्रों के मुताबिक, आईएसआईएल-के आईएसआईएल के मुख्य नेतृत्व दृष्टिकोण को लागू कर वैश्विक एजेंडा पर आगे बढ़ना चाहता है जिसके तहत व्यापक क्षेत्र में आंतकवाद के प्रभाव को फैलाने के लिए अफगानिस्तान को एक अड्डे के तौर पर माना जाता है।

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बड़े हमले करने की क्षमता रखते हैं ये आतंकी संगठन

रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि क्षेत्र से पीछे हटने के बावजूद आईएसआईएल-के काबुल समेत देश के कई हिस्सों में हाई प्रोफाइल हमले करने में सक्षम है। इस संगठन का मकसद उन तालिबान लड़ाकों को भी अपनी तरफ खींचना है जो अमेरिका के साथ हुए समझौते का विरोध करते हैं। निगरानी टीम को यह भी सूचित किया गया कि आईएसआईएल-के मालदीव में भी समर्थकों के नेटवर्कों के साथ काम करता है। संगठन ने 15 अप्रैल, 2020 को मालदीव में अपने पहले हमले का दावा किया था जिसमें पांच सरकारी नौकाओं को निशाना बनाया गया था।

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