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US एंबेसी बंद करने पर चीन की सफाई, कहा- चेंगदू से तिब्बत में जासूसी कर रहा था अमेरिका

Edited By Priyesh Mishra | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

राष्ट्रपति ट्रंप और जिपनिंगराष्ट्रपति ट्रंप और जिपनिंग
हाइलाइट्स

  • चीन ने अमेरिका के चेंगदू वाणिज्यिक दूतावास को बंद करने पर सफाई देते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया
  • चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा कि यहां तैनात कुछ अमेरिकी राजनयिक चीन के घरेलू मामलों में हस्तक्षेप कर रहे थे
  • चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने लिखा- अमेरिका लंबे समय से इस दूतावास का उपयोग तिब्बत में घुसपैठ के लिए करता आया है

पेइचिंग

चीन ने अमेरिका के चेंगदू वाणिज्यिक दूतावास को बंद करने पर सफाई देते हुए कई आरोप लगाए हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा कि यहां तैनात कुछ अमेरिकी राजनयिक चीन के घरेलू मामलों में हस्तक्षेप कर रहे थे। अमेरिकी राजनयिकों ने अपनी पहचान का गलत फायदा उठाते हुए असंगत गतिविधियां की हैं। इसके साथ ही उन्होंने चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी की है।

ग्लोबल टाइम्स ने कहा- अमेरिका को रणनीतिक नुकसान

वहीं, चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि अमेरिका और चीन दोनों ने एक दूसरे को एक-एक महावाणिज्यिक दूतावास बंद करने का आदेश दिया है। ऐसे में दोनों पक्षों का नुकसान आमतौर पर बराबर है, लेकिन चेंगदू में वाणिज्यिक दूतावास के बंद होने से अमेरिका को अधिक रणनीतिक नुकसान होगा। चीनी अखबार ने आरोप लगाया कि अमेरिका लंबे समय से इस दूतावास का उपयोग तिब्बत में घुसपैठ के लिए करता आया है। लेकिन, अखबार ने यह नहीं बताया कि जब चीन को यह पहले से पता था तो उसने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की।

चीन का आरोप देश विरोधी गतिविधियों में शामिल था अमेरिकी दूतावास

चाइना फॉरेन अफेयर्स यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशन के प्रोफेसर ली हैदोंग ने ग्लोबल टाइम्स से कहा कि अमेरिका ने चीन के तिब्बत और दक्षिण पश्चिम चीन के कई जातीय क्षेत्रों में इस दूतावास के जरिए गतिविधियां की हैं। अमेरिकी वाणिज्यिक दूतावास के अनुसार, चेंगदू में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास 1985 में स्थापित किया गया था। जिसके अंतर्गत सिचुआन, युन्नान और गुइझोऊ प्रांत, चोंगकिंग नगर पालिका और तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र आता है।

दूतावास के जरिए तिब्बत में घुसपैठ का आरोप

ग्लोबल टाइम्स ने आरोप लगाया कि तिब्बत क्षेत्र में घुसपैठ करने और बहुत लंबे समय तक चीन के जातीय और धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करने के लिए अमेरिका ने चेंगदू में अपने वाणिज्य दूतावास का उपयोग किया है। यह दूतावास हाल के दिनों में तिब्बत और दक्षिण-पश्चिम चीन के अन्य क्षेत्रों में खुफिया जानकारी एकत्र कर रहा था।

तिब्बत की स्वायत्तता को यूएस का समर्थन

अमेरिका ने तिब्बती लोगों की सार्थक स्वायत्तता के लिए अपने समर्थन का फिर से खुला इजहार किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि तिब्बती लोगों के बुनियादी तथा अहस्तांतरणीय मानवाधिकारों के लिए, उनके विशिष्ट धर्म, संस्कृति और भाषायी पहचान को संरक्षित रखने की खातिर काम करने के लिए हम दृढ़ संकल्पित हैं। भारत में रह रहे तिब्बत के निर्वासित धार्मिक नेता दलाई लामा तिब्बत के लोगों के लिए सार्थक स्वायत्तता की मांग करते रहे हैं। लेकिन चीन 85 वर्षीय दलाई लामा को अलगाववादी मानता है।

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तिब्बत के अधिकारियों पर अमेरिका का वीजा प्रतिबंध

अमेरिका ने तिब्बत में विदेशियों की पहुंच रोकने के काम में शामिल चीन के वरिष्ठ नागरिकों पर नए वीजा प्रतिबंध का ऐलान किया है। इतना ही नहीं, अमेरिका ने चीन के जले पर नमक छिड़कते हुए तिब्बती लोगों की सार्थक स्वायत्तता के प्रति अपने समर्थन को फिर दोहराया है। विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि वह तिब्बत में अमेरिकी लोगों के प्रवेश का आह्वान करने वाले अमेरिकी कानून के तहत चीन में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के कुछ अधिकारियों समेत अनेक चीनी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं।

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इन मुद्दों को लेकर अमेरिका चीन में विवाद

अमेरिका और चीन के बीच विवाद का प्रमुख कारण दुनिया में अपना धौस जमाना है। ट्रेड वॉर के बाद, कोरोना वायरस, हॉन्ग कॉन्ग में नया सुरक्षा कानून, साउथ चाइना सी में अधिपत्य की होड़, भारत-जापान-ऑस्ट्रेलिया और ताइवान के खिलाफ चीन का आक्रामक रवैया, अमेरिकी पत्रकारों पर प्रतिबंध, उइगुरों का नरसंहार और तिब्बत को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद है।

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