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हांगकांग के साथ अमेरिका की संधि खत्म होने से भारतीय रत्न-आभूषण उद्योग को मिलेगी मदद: जीजेईपीसी

नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) अमेरिका की हांगकांग के साथ तरजीही आर्थिक संधि खत्म होने से भारतीय रत्न-आभूषण उद्योग को वहां के बाजार में बढ़त बनाने में मदद मिलेगी। रत्न और आभूषण निर्यात संवर्द्धन परिषद (जीजेईपीसी) ने शुक्रवार को यह बात कही। जीजेईपीसी के चेयरमैन कॉलिन शाह ने कहा, ‘‘ अमेरिका के इस कदम के पीछे की बारीकियों में जाए बगैर, मेरा मानना है कि इसमें देश के रत्न एवं आभूषण कारोबार के लिए अवसर पैदा करने की संभावना है।’’ उन्होंने कहा कि अमेरिका के लिए भारत, फ्रांस और इटली के बाद हांगकांग और चीन रत्न एवं आभूषण का आयात करने

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भाषा | Updated:

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नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) अमेरिका की हांगकांग के साथ तरजीही आर्थिक संधि खत्म होने से भारतीय रत्न-आभूषण उद्योग को वहां के बाजार में बढ़त बनाने में मदद मिलेगी। रत्न और आभूषण निर्यात संवर्द्धन परिषद (जीजेईपीसी) ने शुक्रवार को यह बात कही। जीजेईपीसी के चेयरमैन कॉलिन शाह ने कहा, ‘‘ अमेरिका के इस कदम के पीछे की बारीकियों में जाए बगैर, मेरा मानना है कि इसमें देश के रत्न एवं आभूषण कारोबार के लिए अवसर पैदा करने की संभावना है।’’ उन्होंने कहा कि अमेरिका के लिए भारत, फ्रांस और इटली के बाद हांगकांग और चीन रत्न एवं आभूषण का आयात करने वाले चौथा बड़ा देश हैं। वर्ष 2019 में हांगकांग और चीन ने क्रमश: 98.08 करोड़ डॉलर और 2.63 अरब डॉलर के रत्न और आभूषण अमेरिका को निर्यात किए। शाह ने कहा कि हांगकांग के साथ तरजीही संधि खत्म होने से भारत के लिए नए ऑर्डर और कारोबारी अवसर पैदा होंगे। इसके बाद वहां से विनिर्माण कारखाने भी भारत आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि कई भारतीय कंपनियों के कार्यालय हांगकांग में है। ऐसे में कारोबार प्रभावित होने के चलते उनके देश वापस आने की संभावना है। जीजेईपीसी के मुताबिक भारत ने 2019-20 में अमेरिका को 9.17 अरब डॉलर और 2018-19 में 10.48 अरब डॉलर के रत्न-आभूषण का निर्यात किया था।

Web Title gjepc will help indian gemstone industry by ending us treaty with hong kong(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)

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