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सचिन और 18 बागी विधायकों पर 10:30 बजे आएगा राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला

सचिन और 18 बागी विधायकों पर 10:30 बजे आएगा राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला

राजस्थान की राजनीति के लिए आज अहम दिन है

नई दिल्ली :

राजस्थान की राजनीति में आज सबसे अहम दिन क्योंकि कांग्रेस विधायक दल की बैठक में हिस्सा न लेने वाले सचिन पायलट (Sachin Pilot) सहित 19 विधायकों के खिलाफ विधानसभा अध्यक्षता की ओर से दिए गए नोटिस पर आज हाईकोर्ट फैसला सुना सकता है.  वहीं आज सीएम अशोक गहलोत (Ashok Gehlot)  सरकार का भी भविष्य तय होगा.  इससे पहले हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए आज के दिन के लिए फैसला टाल दिया था. इसे सचिन पायलट के लिए फौरी राहत माना गया. लेकिन हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई जिसमें कहा गया है कि संविधान की 10वीं अनुसूची के अंतर्गत उनके द्वारा की जा रही अयोग्यता की कार्यवाही से हाईकोर्ट रोक नहीं लगा सकता है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया है साथ ही कई अहम टिप्पणी भी की हैं. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि हाइकोर्ट इस मामले में अपना निर्णय सुना सकता है.

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हाईकोर्ट का फैसला और संभावनाएं

1- अगर हाईकोर्ट विधानसभा अध्यक्ष की ओर से की जा रही है अयोग्यता की कार्यवाही को सही ठहराता है तो सचिन पायलट सहित 18 विधायकों की संख्या घट जाएगी. इससे सदन में मौजूदा सदस्यों की संख्या घट जाएगी और अशोक गहलोत के लिए बहुमत साबित करना आसान हो जाएगा.  माना जा रहा है कि अशोक गहलोत के पास कम से कम 101 विधायकों का समर्थन है और बहुमत के लिए भी 101 ही विधायक चाहिए. लेकिन अगर सचिन और पायलट के समर्थक 18 विधायक अयोग्य घोषित होते हैं तो सदन में बहुमत का आंकड़ा 91 के पास आ जाएगा. 

2- वहीं अगर सचिन पायलट और बागी विधायकों के पक्ष में फैसला आता है तो अशोक गहलोत के लिए मुश्किल हो सकती है क्योंकि उनके पास बहुमत से बहुत ज्यादा विधायक नही हैं. हालांकि अशोक गहलोत का दावा है कि उनके पास बहुमत से ज्यादा विधायक हैं.  

3- बात बीजेपी की करें तो वह अभी पूरी शांत है. विधानसभा में उसके विधायकों की संख्या 75 है. कांग्रेस के 19 बागी और बीटीपी विधायको की जोड़ भी दें तो यह आंकड़ा 99 तक पहुंचता है. 

कुल मिलाकर यह है कि आज सचिन पायलट और सीएम अशोक गहलोत के लिए चुनौती भरा दिन है. लेकिन ये जरूर कहा जाता है कि हाईकोर्ट का फैसला कुछ भी आए. मामला अभी राजनीति के बराबरी के दांवपेंचों का है और न रास्ता सचिन पायलट के लिए आसान और न अशोक गहलोत के लिए

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