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अमेरिका और चीन में गहराया तनाव, ह्यूस्‍टन वाण‍िज्‍य दूतावास नहीं छोड़ रहा ड्रैगन

Edited By Shailesh Shukla | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

चीन ने ह्यूस्‍टन के वाणिज्‍य दूतावास को छोड़ने से क‍िया इनकारचीन ने ह्यूस्‍टन के वाणिज्‍य दूतावास को छोड़ने से क‍िया इनकार
हाइलाइट्स

  • अमेरिका और चीन के बीच ह्यूस्‍टन वाणिज्‍य दूतावास को लेकर तनाव गहरा गया है
  • चीन के वाणिज्‍य दूतावास ने अमेरिका के आदेश को मानने से इनकार कर दिया है
  • अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार तक दूतावास को खाली करने का आदेश दिया था

ह्यूस्‍टन

अमेरिका और चीन के बीच ह्यूस्‍टन वाणिज्‍य दूतावास को लेकर तनाव गहरा गया है। चीन के वाणिज्‍य दूतावास ने अमेरिका के विदेश मंत्रालय के आदेश को मानने से इनकार कर दिया है। इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार तक चीनी वाणिज्‍य दूतावास को खाली करने का आदेश दिया था। उधर, चीन के ह्यूस्‍टन स्थित महावाणिज्‍य दूत काई वेई ने कहा कि उनका कार्यालय ‘अगले आदेश तक खुला रहेगा।’

काई वेई ने कहा कि चीन वाणिज्‍य दूतावास को बंद करने के आदेश का विरोध कर रहा है। उन्‍होंने पोलिटिको न्‍यूज वेबसाइट से बातचीत में कहा, ‘आज हम अभी भी सामान्‍य तरीके से काम कर रहे हैं। इसलिए हम देखेंगे कि कल क्‍या होगा।’ चीनी वाणिज्‍य दूत ने कहा कि चीन ने अमेरिका से दूतावास को बंद करने के अपने आदेश को वापस लेने के लिए कहा है। चीन ने दलील दी है कि यह वियना समेत अन्‍य अंतरराष्‍ट्रीय समझौतों का उल्‍लंघन है।

चीन ने अमेरिकी दूतावास को बंद करने द‍िया आदेश

काई ने कहा, ‘हम हर तरह के हालात के लिए तैयार हैं लेकिन हमने कड़ा विरोध भी दर्ज कराया है…हम अमेरिका से अनुरोध करते हैं कि अपने अवैध आदेश को वापस ले।’ चीनी वाणिज्‍य दूत का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब चीन ने अमेरिका को अपने चेंगदू में स्थित वाणिज्‍य दूतावास को बंद करने का आदेश दिया है। चेंगदू में स्थित अमेरिकी वाण‍िज्‍य दूतावास चीन में कई प्रांतों का कामकाज देखता है। इसी केंद्र के पास तिब्‍बत स्‍वायत्‍तशासी इलाके की भी जिम्‍मेदारी है। माना जा रहा है कि तिब्‍बत को लेकर अमेरिकी कदम को देखते हुए चीन ने यह कदम उठाया है।

बीजिंग ने अमेरिका-चीन रिश्‍तों में आए तनाव के लिए वॉशिंगटन को जिम्‍मेदार ठहराया और मांग की कि अमेरिका तत्‍काल ह्यूस्‍टन में चीनी वाणिज्‍य दूतावास को बंद करने के आदेश को वापस ले। इससे पहले अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने गुरुवार को कहा था कि चीन का ह्यूस्टन स्थित वाणिज्य दूतावास जासूसी का गढ़ बन गया था। पॉम्पियो ने कहा, ‘इस सप्ताह हमने चीन के ह्यूस्टन स्थित वाणिज्य दूतावास को बंद करने का फैसला किया है क्योंकि यह जासूसी और बौद्धिक संपदा को चुराने का अड्डा बन गया था।’

अमेरिका और चीन में न्‍यू कोल्‍ड वॉर की आशंका बढ़ी

उन्होंने कहा, ‘चीन ने हमारी बौद्धिक संपदा चुराई और ट्रेड सीक्रेट चुराए जिसकी वजह से लाखों अमेरिकी नागरिकों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी।’ इससे पहले अमेरिका ने चीन को ह्यूस्टन में स्थित अपने वाणिज्य दूतावास को 72 घंटे में बंद करने का आदेश दिया था जिससे दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तनाव बढ़ गया है। देश में नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीन के खिलाफ कड़े कदम उठाने के सिलसिले में यह नया कदम है। चीन ने बुधवार को इस आदेश की निंदा करते हुए इसे ‘अपमानजनक’ बताया था और कहा कि अगर इस फैसले को वापस नहीं लिया गया तो इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।

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